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गुमनाम सिपाही

ना कोई मेरा नाम लेगा, ना कोई मुझे वर्दी में देखेगा
ना सुनाए जाएँगे मेरे बहादुरी के किससे
शायद एक दर्दनाक मौत आएगी मेरे हिस्से
ना कोई देगा मुझे इकीस तोपों की सलामी
गुमनाम रह जाएगी मेरी कहानी
सपने मेरे भी थे के दुनिया घूम के आऊँ
किस्सी से प्यार करलूँ और अपना घर बसाऊँ
पर शायद खुदा को कुछ और ही मंज़ूर था
मेरे ऊपर ये सरफ़रोशी का जुनून थमा दिया
मुझे नहीं चाहिए परमवीर चक्र
मुझे मेरे कर्मों पे पूरा है फकर
बस इतना ही काफ़ी है के जब याद करो उस जवान को
जो कर रहा है सीमा की रक्षा
मुझे भी याद कर लेना
थोड़ा प्यार कर लेना, थोड़ा हँस लेना, थोड़ा रो लेना
मेरे हिस्से की आज़ादी तुम खुल के जी लेना
ये मेरा अखरी mission तुम पूरा कर लेना

This is a tribute to those soldiers who are out there as under-cover agents, risking everything there is to be risked to help our soldiers protect our borders all the time. Jai Hind..

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Tavish is the administrator and founder of Sensible Bakwas. He is a software engineer by profession and a writer by passion. In case you want to get in touch with him, he is an email away at tavish.chadha@gmail.com. Hope you enjoy your time here. Do leave your feedback in the comment section here.

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One Response to "गुमनाम सिपाही"

  1. Hey Tavish, this is a wonderful tribute to the unsung heroes of our country. Very heartfelt and beautifully written.
    xoxo, Z ~

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